T20 कप 2026 – पहला सप्ताह: मुम-भाइयों का धमाकेदार आगाज, SKY का शानदार प्रदर्शन

T20 कप 2026 को अभी एक ही हफ्ता हुआ है और हमारे मुम-भाइयों ने कहानी लिखनी शुरू कर दी है! कोलंबो से लेकर दिल्ली तक, हर चौके-छक्के और हर यॉर्कर में ब्लू-एंड-गोल्ड का डीएनए साफ झलक रहा है।

वानखेडे के चहेतों से लेकर हमारे ग्लोबल रिक्रूट्स तक, MI क्लास ऑफ '26 ना सिर्फ वर्ल्ड स्टेज पर छाई हुई है, बल्कि टूर्नामेंट की दिशा भी तय कर रही है, वो भी खिताब की तरफ पूरी रफ्तार से बढ़ते हुए।

सूर्यकुमार यादव (भारत – कप्तान)

अपने सूर्या दादा इस वर्ल्ड कप में भारत की टाइटल डिफेंस की असली धुरी बने हुए हैं। USA के खिलाफ वानखेडे में 71/6 की मुश्किल हालत से टीम को निकालते हुए उन्होंने 49 गेंदों में नाबाद 84 रनों की क्लासिक पारी खेली।

पाकिस्तान के खिलाफ दबाव भरे मैच में, कोलंबो की मुश्किल पिच पर उनका संभला हुआ 32 रनों का योगदान बेहद अहम रहा। तीन मैचों में उनकी शांत और समझदारी की बदौलत भारत प्वाइंट्स टेबल में मजबूती से टॉप पर है।

जसप्रीत बुमराह (भारत)

ओपनर मिस करने के बाद जब “बूम-बूम” लौटे, तो पूरा प्लान तैयार था। नामीबिया के खिलाफ 1/20 से शुरुआत की, लेकिन रविवार को पाकिस्तान के खिलाफ उन्होंने असली क्लास दिखाई।

पावरप्ले में 2/17 विकेट लेकर टॉप ऑर्डर की कमर तोड़ दी। ये सिर्फ स्पेल्स नहीं थे, ये भारत को सुपर 8 तक पहुंचाने वाली गेंदबाजी थी। दबाव जितना बढ़ता है, बुमराह उतने ही ठंडे दिमाग से खेलते हैं - असली मुम-भाई स्टाइल।

हार्दिक पांड्या (भारत)

बड़े मैचों के खिलाड़ी, हमारे कुंग-फू पांड्या ने फिर साबित कर दिया कि हर गिरावट एक जोरदार वापसी की वजह बन सकती है। USA के खिलाफ शांत शुरुआत के बाद, नामीबिया के खिलाफ उन्होंने 28 गेंदों में 52 रन और 2/21 लेकर प्लेयर ऑफ द मैच जीता।

पाकिस्तान के खिलाफ कोलंबो में उनका ओपनिंग ओवर का विकेट-मेडन मैच का टर्निंग प्वाइंट रहा। चार विकेट के साथ, हार्दिक का स्वैग और ऑल-राउंड प्रदर्शन भारत को वो बैलेंस दे रहा है जो ट्रॉफी तक ले जा सकता है।

तिलक वर्मा (भारत)

हमारे ‘स्टारबॉय’ तिलक वर्मा, मिडिल ऑर्डर में बल्लेबाजी करते हुए अपने पहले वर्ल्ड कप में गजब का प्रदर्शन दिखा रहे हैं। शुरुआती दो मैचों में सधी हुई 25-25 रनों की पारियां और गेंद से शादाब ख़ान को आउट करना (1/11) उनके ऑल-राउंड टैलेंट का सबूत है। MI की बेंच स्ट्रेंथ को वो मजबूती दे रहे हैं जिसकी टीम को जरूरत होती है।

मिचेल सैंटनर (न्यूजीलैंड – कप्तान)

पहली बार वर्ल्ड कप में ब्लैक कैप्स की कमान संभाल रहे हमारे कीवी मुम-भाई पूरी तरह कंट्रोल में नजर आए हैं। साउथ अफ्रीका के खिलाफ हार और विकेट ना मिलने के बावजूद, तीन मैचों में उनकी इकॉनमी 6.58 की कसी हुई बनी हुई है।

मिडिल ओवर्स में रन रोकने की उनकी काबिलियत न्यूजीलैंड के लिए बेहद अहम है और जैसे-जैसे टूर्नामेंट आगे बढ़ेगा, उनका लेफ्ट-आर्म स्पिन टीम का सबसे बड़ा तुरुप का इक्का साबित हो सकता है।

शेरफेन रदरफोर्ड (वेस्ट इंडीज़)

वानखेडे में इस हफ्ते की सबसे धमाकेदार प्रदर्शन हमारे कैरेबियन मुम-भाई ने ही की! इंग्लैंड के खिलाफ जब विंडीज पूरी तरह बैकफुट पर थे, तब रदरफोर्ड ने 42 गेंदों में नाबाद 76 रन ठोक दिए, वो भी सात गगनचुंबी छक्कों के साथ। ये बिल्कुल क्लासिक MI फिनिशर वाली पारी थी, जिसने साबित कर दिया कि रदरफोर्ड अकेले दम पर मैच की स्क्रिप्ट पलट सकते हैं।

विल जैक्स (इंग्लैंड)

“जैक्स-हैमर” इंग्लैंड के कैंपेन में जान फूंक रहे हैं। नेपाल के खिलाफ प्लेयर ऑफ द मैच प्रदर्शन (39 रन और एक विकेट) में उनका ऑल-राउंड असर और आक्रामक सोच साफ दिखी, एकदम MI डीएनए के मुताबिक। दबाव भरे चेज में लंबे शॉट्स लगाने और जरूरत पड़ने पर ऑफ-स्पिन डालने की उनकी काबिलियत इंग्लैंड के लिए सुपर 8 की जंग में बड़ा प्लस बन रही है।

रयान रिकेलटन (दक्षिण अफ्रीका)

विकेटकीपर-ओपनर रिकेलटन इस वक्त प्रोटियाज के सबसे बेखौफ अटैकर बनकर उभरे हैं। अफगानिस्तान के खिलाफ डबल सुपर ओवर वाले रोमांचक मुकाबले में उनकी अहम 61 रनों की पारी ने दिखा दिया कि वो सबसे ज्यादा दबाव में भी शांत रह सकते हैं। उनका मौजूदा खेलने का अंदाज खुलकर और बिना डर पूरी तरह मुंबई इंडियंस की “फियरलेस क्रिकेट” की झलक देता है।

क्विंटन डी कॉक (दक्षिण अफ्रीका)

क्विन्नी इस वक्त पूरे “लेजेंड मोड” में हैं। शनिवार को न्यूजीलैंड के खिलाफ उन्होंने T20I में 3,000 रन पूरे करने वाले पहले साउथ अफ्रीकी बल्लेबाज बनने का कारनामा किया। इससे भी बड़ी बात 33वां डिसमिसल लेकर उन्होंने T20 कप इतिहास में सबसे ज्यादा डिसमिसल का एमएस धोनी का रिकॉर्ड तोड़ दिया।

अफगानिस्तान के खिलाफ निर्णायक 59 रनों की पारी के साथ, वो साबित कर रहे हैं कि MI में निखरी क्लास हमेशा के लिए होती है और बड़े मंच पर रिकॉर्ड टूटते ही हैं।

कॉर्बिन बॉश (दक्षिण अफ्रीका)

“शांत मैच-विनर” बॉश अपनी अहमियत धीरे-धीरे लेकिन पुख्ता तरीके से साबित कर रहे हैं। अब तक दो मैचों में दो विकेट लेकर वो मिडिल ओवर्स में प्रोटियाज की रणनीतिक रीढ़ बन चुके हैं। उनकी डिसिप्लिन, संयम और दबाव में सही फैसले लेने की काबिलियत उन्हें एक साइलेंट लेकिन बेहद जरूरी टीम प्लेयर बनाती है।