"गेंदबाजों को बुमराह से सीखना चाहिए मेहनत का जुनून": पारस म्हाम्ब्रे  

 

पलटन, अब फिर से फोकस करने और अपने अगले मुकाबले के लिए तैयारी करने का समय आ गया है। मुंबई इंडियंस 7 अप्रैल, 2026 को गुवाहाटी के बरसापारा क्रिकेट स्टेडियम में राजस्थान रॉयल्स को कांटे की टक्कर देगी। अगले मैच से पहले, हमारे बॉलिंग कोच पारस म्हाम्ब्रे, जो गेंदबाजी की रणनीति रखने में माहिर हैं, उन्होंने एमआई चर्चा में बातचीत के दौरान जो कहा वो आपको भी जानना चाहिए। 

इस मास्टरक्लास सेगमेंट के दौरान उन्होंने पलटन को एमआई अटैक में जोश भरने वाले अहम सुझाव दिए। इसके साथ ही ब्लू एंड गोल्ड जर्सी में अगली पीढ़ी के खिलाड़ियों के साथ काम करने की योजनाओं के बारे में बताया।💙

पारस ने जसप्रीत बुमराह और एक युवा खिलाड़ी से ग्लोबल आइकन 👑 बनने तक के उनके सफर पर बात की और कहा कि आज भी ट्रेनिंग में उन्होंने अपना शानदार अंदाज बनाए रखा है। उन्होंने आगे कहा, “बूम से हर खिलाड़ी और गेंदबाजों को जो एक सीख लेनी चाहिए, वो है उनकी कड़ी मेहनत। जिस तरह से वह नेट में प्रैक्टिस करते हैं, हर उस चीज पर फिर से मेहनत करते हैं जिस पर उन्होंने काम किया है और वह उसे मैच के दौरान इस्तेमाल करेंगे। लेकिन पिछले कुछ सालों में भारतीय टीम के साथ वह एक शानदार बॉलर के रूप में उभरे हैं और उससे भी कहीं ज्यादा एक बेहतर इंसान के रूप में, जो वाकई कमाल की बात है।

इसके अलावा, पारस ने पहले दो मैचों के दौरान एमआई की गेंदबाजी रणनीति पर अपनी राय दी और बताया कि कोच के रूप में वह अलग-अलग परिस्थितियों में रणनीति बनाने में कैसे मदद करते हैं। उन्होंने कहा, "एक बॉलिंग यूनिट के रूप में हम हमेशा इस पर बात करते हैं कि बीच में विकेट कैसे लें, अपने प्लान को कैसे लागू करें, विरोधी टीम पर दबाव कैसे बनाए रखें और खिलाड़ियों की ताकत और कमजोरियों का कैसे फायदा उठाएं।"

“दोनों पिचें अलग-अलग हैं और आपको समझाने के लिए बता दूं, जब हम मुंबई में खेलते हैं तो वहां लाल मिट्टी की पिचें होती हैं। लाल मिट्टी की खासियत अलग होती है। उस पर घास होने के कारण बाउंस मिलता है और शॉट आसानी से खेले जा सकते हैं। स्क्वायर कट और पुल शॉट ऐसी पिचों पर बहुत अच्छे से खेले जा सकते हैं। जब हम दिल्ली में काली मिट्टी की पिचों पर खेलने जाते हैं, तो वैसा बाउंस नहीं मिलता और हमें अलग-अलग जगहों पर शॉट खेलने पड़ते हैं।”

टीम में अश्विनी और इज़हार जैसे युवा खिलाड़ियों और हर सीजन में एमआई द्वारा अपनाई जाने वाली नई गेंदबाजी रणनीतियों के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, "सबसे पहले तो उन स्काउट्स को श्रेय जाता है जो मैदान पर जाकर मैच देखते हैं और इन युवा खिलाड़ियों की स्किल को पहचानते हैं। मैं खुद को उनकी जगह रखकर सोचता हूं कि जब मैं अपने करियर के इस स्टेज पर था तो क्या सोच रहा था।"

आखिर में म्हाम्ब्रे ने अपनी राय रखी। अगर दोनों बॉलिंग कोच, मलिंगा और खुद उनके लिए अलग-अलग रोल होते, तो उन्होंने कहा, “कोई अंतर नहीं है। हम दोनों जानते हैं कि हमारा आखिरी लक्ष्य क्या है। यह सिक्के के दो पहलुओं की तरह है। हमारे बीच भरोसा, समझ और सम्मान है। कोई प्रतिस्पर्धा नहीं है, हम दोनों अपनी टीम के आखिरी लक्ष्य की ओर काम कर रहे हैं।”

हर यॉर्कर, शातिर वैरिएशन और सटीक रणनीति के साथ पारस म्हाम्ब्रे एमआई की शानदार गेंदबाजी के पीछे शांत लेकिन मजबूत ताकत के रूप में खड़े हुए हैं। 💪