सपनों से दबदबे तक: कप्तान कौर की खिलाड़ियों ने लॉर्ड्स में रचा इतिहास 

सपनों से दबदबे तक: कप्तान कौर की खिलाड़ियों ने लॉर्ड्स में रचा इतिहास 

By Mumbai Indians

लॉर्ड्स की ऐतिहासिक बालकनी सालों से क्रिकेट की गौरवशाली विरासत और यादगार मुकाबलों की गवाह रही है, जहां अनगिनत दिग्गजों ने इतिहास रचा और जीत का जश्न मनाया। लेकिन इस शानदार इतिहास में एक और कहानी जुड़ गई है।

क्रिकेट के होम इंग्लैंड में, जहां पीढ़ियों से दिग्गज खिलाड़ी तैयार हुए हैं। हमारी अपनी मुंबई की खिलाड़ी हरमनप्रीत कौर और उनकी टीम ने रिकॉर्ड बुक में अपना नाम दर्ज कराया है, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगा।

लॉर्ड्स में पहला महिला टेस्ट मैच खेला गया, जो 13 जुलाई 2026 को मेहमान टीम भारत की इंग्लैंड पर 270 रनों की जबरदस्त जीत के साथ खत्म हुआ। 💙

270 रनों की यह जीत भारतीय महिला टेस्ट क्रिकेट के इतिहास की सबसे यादगार जीतों में से एक बन गई। रनों के अंतर के हिसाब से यह महिला टेस्ट क्रिकेट के इतिहास की चौथी सबसे बड़ी जीत है।

पहली पारी में बल्लेबाजी करते हुए भारत ने 74.5 ओवर में 285 रन बनाए। स्मृति मंधाना ने दमदार 83 रनों की पारी खेली, जबकि कप्तान हरमनप्रीत कौर ने 58 और दीप्ति शर्मा ने 57 रनों का अहम योगदान दिया और टीम को मजबूत स्कोर तक पहुंचाया।

इसके जवाब में इंग्लैंड की टीम 59.1 ओवर में महज 170 रन पर ऑलआउट हो गई। भारत की तेज गेंदबाज क्रांति गौड़ ने अपने शानदार प्रदर्शन से लॉर्ड्स के प्रतिष्ठित ऑनर्स बोर्ड पर अपना नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज कराया। उन्होंने 17 ओवर में 7 मेडन डालते हुए सिर्फ 37 रन देकर 5 विकेट हासिल किए। उनका इकॉनमी रेट महज 2.20 रहा।

महिला टेस्ट क्रिकेट में किसी भारतीय तेज गेंदबाज द्वारा यह सिर्फ पांचवां पांच विकेट लेने का कारनामा है। 

इसके अलावा अपनी दूसरी पारी में बल्लेबाजी करते हुए भारत ने 341/7 पर पारी घोषित कर दी। यास्तिका भाटिया ने शानदार शतक जड़ा, उन्होंने 158 गेंदों में 113 रन (14 चौके) बनाए। स्मृति मंधाना ने 70 रन बनाए। वह अपना 300वां इंटरनेशनल मैच खेल रही थीं और इस मुकाम तक पहुंचने वाली सबसे कम उम्र की महिला क्रिकेटर बनीं। ऋचा घोष 50 रन बनाकर नाबाद रहीं।

वहीं, यास्तिका महिला टेस्ट की तीसरी या चौथी पारी में शतक लगाने वाली पहली भारतीय बल्लेबाज बन गईं। वह वूमेंस टेस्ट में विकेटकीपर के तौर पर शतक लगाने वाली दूसरी भारतीय खिलाड़ी भी बनीं। 

लॉर्ड्स के ऑनर्स बोर्ड पर अपना नाम दर्ज होना उनके लिए बहुत ही यादगार पल था। साथ ही 83 और 70 रन बनाकर स्मृति महिला टेस्ट की दोनों पारियों में 50 से ज्यादा रन बनाने वाली चौथी भारतीय खिलाड़ी बन गईं। 👏

फाइनल इनिंग्स में इंग्लैंड 62.5 ओवर में 186 रन पर ऑलआउट हो गया, जिसमें स्नेह राणा ने 4/42 के शानदार आंकड़े दर्ज किए। भारत ने यह मैच 270 रनों से अपने नाम कर लिया। यह दोनों पारियों के संयुक्त स्कोर 626 रनों के साथ भारत का टेस्ट मैच में दूसरा सबसे बड़ा स्कोर था। गेंद से शानदार प्रदर्शन करने वाली क्रांति गौड़ को प्लेयर ऑफ द मैच का सम्मान मिला।

कप्तान हरमनप्रीत कौर ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह भारतीय टीम की सबसे अहम कड़ी हैं। जब टीम को उनकी सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब उन्होंने दबाव में धैर्य बनाए रखा। अपनी टीम के लिए उन्होंने शानदार और महत्वपूर्ण अर्धशतकीय पारी खेली।

सिर्फ बल्ले से ही नहीं अपनी कप्तानी से भी हरमनप्रीत ने मैच पर पूरी तरह अपनी पकड़ बनाए रखी। उनकी सटीक फील्ड प्लेसमेंट, गेंदबाजों का बेहतरीन इस्तेमाल और हर मौके पर आक्रामक रणनीति ने इंग्लैंड को मैच में वापसी करने का मौका नहीं दिया। जब संयम की जरूरत थी, तब वह शांत रहीं और जब अटैक का समय आया, तब पूरी आक्रामकता के साथ फैसले लिए।

इस ऐतिहासिक जीत के साथ कप्तान कौर ने अपनी गौरवशाली विरासत में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया। 💪

भारतीय वूमेंस क्रिकेट के लिए एक शानदार जीत, अनगिनत यादें और एक और अहम 

उपलब्धि। आने वाले सालों में जब भी लॉर्ड्स के यादगार पलों की बात होगी, तो भारत की इस जीत का जिक्र जरूर होगा। 

जब भारत ने जीत पक्की करने वाला आखिरी विकेट हासिल किया, तो पूरा स्टेडियम जश्न में डूब गया। यह जीत सिर्फ जीत नहीं बल्कि नए और शानदार दौर की शुरुआत भी थी। यह एक ऐसी टीम है जो लगातार रुकावटों को तोड़ कर आगे बढ़ रही है। नए रिकॉर्ड दर्ज कर रही है और अपने शानदार सफर से भारतीयों को प्रेरित कर रही है।