अजिंक्य रहाणे ने क्रिकेट को कहा अलविदा, भावुक संदेश के साथ किया संन्यास का ऐलान

अजिंक्य रहाणे ने क्रिकेट को कहा अलविदा, भावुक संदेश के साथ किया संन्यास का ऐलान

By Mumbai Indians

हर पीढ़ी को कभी न कभी ऐसा क्रिकेटर देखने का सौभाग्य मिलता है, जो मैदान पर अपने प्रदर्शन के साथ-साथ अपने व्यक्तित्व से भी प्रेरित करता है। अजिंक्य रहाणे ऐसे ही खिलाड़ियों में शामिल हैं। उन्होंने आज सोशल मीडिया पर एक भावुक वीडियो साझा करते हुए क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास की घोषणा कर दी।

रहाणे ने भारत के लिए 85 टेस्ट, 90 वनडे और 20 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले। उन्होंने हमेशा अपने खेल से जवाब दिया। कप्तान के रूप में भी उन्होंने उदाहरण पेश करते हुए टीम का नेतृत्व किया।

अपने विदाई संदेश में रहाणे ने कहा, "जिंदगी की सच्चाई यही है कि हर चीज की शुरुआत होती है और उसका अंत भी। जब वह समय आता है, तो उसका सम्मान करते हुए आगे बढ़ना चाहिए। बल्लेबाज़ी में मैंने हमेशा सही टाइमिंग पर भरोसा किया है और उसकी अहमियत समझी है। आज मुझे लगता है कि मेरे लिए आगे बढ़ने और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट सहित क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास लेने का यही सही समय है।"

एक शानदार करियर का यह अध्याय भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन अजिंक्य रहाणे का सफर आने वाली पीढ़ियों के क्रिकेटरों को लंबे समय तक प्रेरित करता रहेगा।

मुंबई के मैदानों से निकलकर सबसे बड़े मंच पर क्रिकेट खेलने का सपना लेकर अजिंक्य रहाणे ने साल 2008 में महज 19 वर्ष की उम्र में गर्व के साथ मुंबई इंडियंस की ब्लू एंड गोल्ड जर्सी पहनी।

अगले दो सीजन तक मुंबई इंडियंस का हिस्सा रहते हुए उन्हें महान खिलाड़ियों से भरे ड्रेसिंग रूम में सीखने का अवसर मिला। हर अनुभव को आत्मसात करते हुए उन्होंने अपने करियर की पहली बड़ी उड़ान भरी। यही वह शुरुआत थी, जिसने आगे चलकर उनके करियर को संघर्ष, विनम्रता और शानदार खेल भावना की पहचान दी।

रहाणे ने अपने संदेश में कहा, "डोंबिवली से एक छोटे लड़के के रूप में सिर्फ अभ्यास करने के लिए सफर शुरू किया था और इस खेल को अपना सब कुछ दे दिया। हर दिन, हर पारी और बल्लेबाज़ी के हर मौके पर मेरा एक ही सपना था, भारत की कैप पहनना। मैंने हमेशा एक ही सिद्धांत अपनाया कि देश और टीम को खुद से ऊपर रखा जाए। मैंने पूरी ईमानदारी के साथ क्रिकेट खेला और हमेशा विश्वास किया कि अगर आपकी नीयत सही है, तो खेल भी आपका साथ देता है।"

इसके बाद आई बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी 2020-21, जिसने रहाणे को भारत के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज और प्रेरणादायी कप्तानों में शामिल कर दिया। मुश्किल परिस्थितियों में टीम की वापसी का नेतृत्व करते हुए उन्होंने मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) पर यादगार शतक जड़ा।

बाद में 19 जनवरी 2021 को उनकी कप्तानी में भारत ने गाबा में ऐतिहासिक तीन विकेट से जीत दर्ज की। इस जीत के साथ ऑस्ट्रेलिया का उस मैदान पर 32 वर्षों से चला आ रहा अजेय क्रम टूटा और भारत ने 2-1 से सीरीज़ अपने नाम की।

रहाणे ने अपने टेस्ट करियर में 12 शतक लगाए, जिनमें से अधिकांश इंग्लैंड, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका और वेस्टइंडीज जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ आए। सीमित ओवरों के क्रिकेट में भी उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए 2014 और 2016 टी20 विश्व कप तथा 2015 वनडे विश्व कप में हिस्सा लिया।

अब रहाणे अपनी सीख और अनुभव अगली पीढ़ी के खिलाड़ियों तक पहुंचाना चाहते हैं। उन्होंने कहा, "मैं अगली पीढ़ी की मदद करने, इस खेल से मिले वैल्यू को साझा करने और उस क्रिकेट को कुछ लौटाने के लिए उत्साहित हूं, जिसने मुझे सब कुछ दिया। 

मुंबई में एक युवा खिलाड़ी के रूप में शुरुआत से लेकर भारत के लिए खेलने तक का सफर मेरे लिए सबसे बड़ा सम्मान रहा है। इस दौरान जीत और हार दोनों मिलीं, लेकिन क्रिकेट खेलने की खुशी, अलग-अलग टीमों का हिस्सा बनने का अनुभव और जीवनभर की यादें बनाना ही मेरे करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि और संतुष्टि रही है।"

अपने करियर के हर उतार-चढ़ाव में साथ देने वाले प्रशंसकों का आभार जताते हुए रहाणे ने कहा, "हर सुख-दुख में मेरा साथ देने वाले सभी क्रिकेट प्रशंसकों का दिल से धन्यवाद। 'अजिंक्य' का अर्थ है अजेय, लेकिन क्रिकेट ने मुझे कई बार हार दिखाई। 

फिर भी एक जगह ऐसी रही, जहां मैं कभी नहीं हारा और वह थी आप सभी के दिल। आपके प्यार, विश्वास और समर्थन के लिए धन्यवाद। कैप नंबर 278, अब विदा लेता है।"

भले ही उनके करियर का यह अध्याय समाप्त हो गया हो, लेकिन अजिंक्य रहाणे की विरासत आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेगी। मुंबई के मैदानों से बड़े सपने देखने वाले हर युवा क्रिकेटर के लिए उनका सफर एक मिसाल बना रहेगा।