“पलटन हमारी धड़कन है”: हार्दिक पांड्या

By Mumbai Indians

एक शब्द जो हार्दिक पांड्या के साथ जुड़ गया है, वह है ‘ऑरा’। जब यह ऑरा वानखेड़े स्टेडियम जैसे बेहतरीन माहौल में प्रवेश करता है, तो जो उत्साह दिखाई देता है, वह वाकई अविश्वसनीय होता है। IPL 2026 उस उत्साह के ग्यारह साल पूरे होने का प्रतीक है।

इन 11 वर्षों में हार्दिक पांड्या एक साधारण और अनुभवहीन खिलाड़ी से टीम के भरोसेमंद स्टार और प्रेरणादायक खिलाड़ी बन गए हैं।

मुंबई इंडियंस एक्सपीरियंस The MIX के दौरान ब्लू एंड गोल्ड फैंस के बीच बातचीत में उन्होंने उस सफर के बारे में खुलकर बात की, जिसने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया।

उन्होंने कहा, “मुंबई इंडियंस के लिए खेलने से पहले, मैं 19 साल तक सिर्फ एक बल्लेबाज था। मुझे सिर्फ एक ही चीज पता थी कि अगर मुझसे 12 चक्कर दौड़ने को कहा जाता, तो मैं 15 चक्कर दौड़ता। 

अचानक किसी ने मुझे देखा और एक साल बाद मैंने रणजी ट्रॉफी खेली। फिर अचानक स्टैंड्स में मुंबई इंडियंस के स्काउट्स मौजूद थे। वे मुझे देखने भी नहीं आए थे। 

यही इसकी खूबसूरती है। किस्मत से भगवान मेहरबान रहे, मैंने उस मैच में अच्छा प्रदर्शन किया। वे मुझे देखने नहीं आए थे, लेकिन उन्होंने पहचान लिया कि इस लड़के में कुछ खास है और यह लंबे समय तक हमारे लिए खेलेगा। यही MI की स्काउटिंग की खासियत है और यह वाकई शानदार है।”

वह आज भी वही मानते हैं ज्यादा मेहनत करो, हर दिन खुद को बेहतर बनाओ और किस्मत खुद साथ देगी।

उन्होंने आगे कहा, “मुझे सिर्फ मेहनत करना आता था। चाहे कोई कितना भी दबाव डाले, चाहे दुनिया उलट-पलट हो जाए, मुझसे मेरी मेहनत कोई नहीं छीन सकता।”

वानखेड़े स्टेडियम के फैंस आज भी मुंबई इंडियंस के साथ चट्टान की तरह खड़े हैं, जो वफादारी की मिसाल हैं। पिछले 19 सीजन में यही फैंस टीम की ऊर्जा और ताकत रहे हैं।

हार्दिक पांड्या ने आगे कहा, “मैं दिल से बोलूंगा। मुझे प्यार महसूस करना पसंद है एक क्रिकेटर के तौर पर हमें असली हौसला तब मिलता है, जब ये लोग हमारे लिए चीयर्स करते हैं और हर हाल में हमारे साथ खड़े रहते हैं। चाहे हम जीतें या हारें, ये हमें सपोर्ट करते रहते हैं। 

मैं उस प्यार के लिए तरसता हूं। मैं ऐसी जगह से आया हूं, जहां शुरुआत में अपनी जगह बनाना मुश्किल था। मुंबई इंडियंस ही एकमात्र टीम थी, जिसने मुझ पर भरोसा किया और सोचा कि ‘ऐसा भी कैरेक्टर हो सकता है’। उन्होंने मुझे वो ताकत दी, जिससे मैं दिल खोलकर खेल सका।”

“एक उदाहरण देना चाहूंगा कि सेमीफाइनल में भारत बनाम इंग्लैंड का मैच था। हमने देखा है कि जब फैंस पूरी तरह साथ खड़े होते हैं, तो क्या असर होता है।”

तो एक शब्द में वह उन्हें कैसे बयान करेंगे?

“मुझे एक शब्द बहुत पसंद है ‘धड़कन’। बिना धड़कन के आप कुछ नहीं कर सकते। बिना धड़कन के आप छक्के नहीं लगा सकते। बिना धड़कन के आप दौड़ नहीं सकते और बिना धड़कन के, मुंबई इंडियंस, मुंबई इंडियंस नहीं हो सकती।”